नंगी बहन की चूवती चाटी मैंने. वह मेरी चचेरी बहन थी और उस दिन घर में कोई नहीं था. हम दोनों पहले भी सेमक्ष भरी मस्ती करते रहते थे पर आपस में खुले नहीं थे.
दोस्तो, यह बात आज से 2 साल पहले की है. तब हमारा परिवार संयुक्त रूप से एक ही घर में रहता था.
उस समय मैं अपने ताऊ की सबसे छोटी लड़की को बहुत पसंद करता था.
मेरी इस बहन का नाम दिव्या है.
उसकी उम्र 21 साल की हो गई थी और वह देखने में बहुत मस्त माल हो गई थी.
मैं उसे चोदना चाहता था पर घर में सभी के होने की वजह से कुछ कर नहीं सकता था.
इस कहानी में मैंने बताया है कि कैसे मैंने नंगी बहन की चूवती चाटी.
मैं उसके बदन को छूना चाहता था इसलिए जब भी मुझे मौका मिलता तो मैं उसके साथ झगड़ा करता।
झगड़े में छीना झपटी के बहाने मैं उसके बूब्स और गांवड को दबा कर मजा ले लेता.
वह भी मुझे कुछ नहीं बोलती थी।
उससे मुझे महसूस होता कि वह भी मेरे साथ झगड़ा आदि करते समय मेरे बदन से लिपटने में सहज होती थी.
बहुत दिन तक यह सब यूं ही चलता रहा.
इस सबमें सबसे अच्छी बात ये थी कि उसने अब घर में रहते समय ब्रा पहनना बंद कर दिया था और इसी वजह से वह और भी ज़्यादा सेमक्षी लगने लगी थी।
वह अपने मम्मों को खुल्ला रखती थी, तो वह इतनी अधिक कामुक लगती थी कि मेरा लवड़ा एकदम से टनटन करने लगता था.
उसी समय मेरी उससे नजरें मिलती थीं, तो वह कुछ न कुछ ऐसा करने लगती थी … जिससे उसके दूध और ज्यादा थिरक कर मुझे दिखें.
उस दौरान मेरी कोशिश रहती थी कि मुझे उससे चिपकने का अवसर मिले.
फिर जब भी मुझे मौका मिलता, मैं उसकी गांवड से चिपक कर अपना खड़ा लमण्ड उससे सटा देता और उसे भी अपने लौड़े के तने होने का अहसास करवा देता.
फिर जैसे ही वह मुझसे अलग होती, मैं बाथरूम में जाकर उसके नाम की मुठ मार लिया करता था.
वह भी इस बात को समझने लगी थी कि मैं अपना लमण्ड हिलाने गया हूँ. वह इस बात को अपनी मुस्कान से जाहीर भी कर देती थी क्योंकि जब भी मैं बाथरूम से मुठ मारकर बाहर आता, तो वह मुझे देख कर एक अर्थपूर्ण मुस्कान बिखेरती हुई मुझे देखती थी.
कई बार ऐसा भी हुआ कि जैसे ही दिव्या नहा कर बाहर निकलती तो मैं झट से अन्दर घुस जाता और उसकी उतारी हुई पैंटी को सूंघने लगता.
कभी कभी मैं उसकी पैंटी पर मुठ मारकर अपना माल टपका कर बाहर आ जाता था.
वह अपनी पैंटी पर जब मेरे वीर्य को देखती, तब भी कुछ भी नहीं बोलती थी.
शायद उसको भी इस सब में मजा आता था और वह भी यही चाहती थी कि यह सब अगर घर में ही एंजाय करने को मिल जाए तो सबसे अच्छा रहेगा.
चूंकि हमारे घर में लड़की को अकेली घर से बाहर जाना मना है, तो उसके लिए किसी बाहरी लड़के से दोस्ती कर पाना मुश्किल था।
तब भी यदि किसी तरह से वह कोई ब्वॉयफ्रेंड बना भी लेती तो भी उसको उससे मिलने जाना नामुमकिन ही था.
मैं आगे बढ़ने से पहले आप सबको दिव्या के बारे में बताता हूँ.
वह दिखने में एक नंबर की माल है।
उसकी उभरी हुई गांवड और उठे हुए दूध उसे किसी आईटम गर्ल जैसा बनाते हैं. साथ में उसकी ज़ीरो फिगर कयामत ढहाती है.
वह किसी सेमक्षी मॉडल की तरह पटाखा माल है.
फिर वह घर पर बहुत ही ढीले और छोटे कपड़े पहनती है, जिसमें से उसकी दूधिया जांघें बहुत ही अच्छी लगती हैं।
अब वह ब्रा भी नहीं पहनती है, जिससे उसके बूब्स एकदम फ्री रह कर थिरकते हैं.
उसे देखने के बाद किसी का गांवड टाइट हो सकता है.
मेरी बहन अभी तक कच्ची कली थी. अभी तक कोई भी उसको फूल नहीं बना पाया था.
दिव्या के साथ यूं ही मेरा छिपा हुआ इश्क चलता रहा.
वह भी काफी हद तक मुझे अपने इशारों से समझा चुकी थी कि वह भी मुझसे चुवदवना चाहती है.
फिर एक दिन मुझे उसको चोदने का मौका मिल गया.
उस दिन घर पर कोई नहीं था; सब घर वाले बाहर गए हुए थे.
घर में मैं ओर वह हम दो ही थे.
मैंने देखा कि आज अच्छा मौका है. इसको चोदने का इससे अच्छा अवसर नहीं मिलेगा.
वह रूम में टीवी देख रही थी.
मैं उसके पास गया और कुछ इधर उधर की बात करते हुए वहीं बैठ गया.
कुछ ही देर के बाद मैंने उसके हाथ से रिमोट ले लिया.
उसने मुझसे रिमोट वापस छीन लिया।
बस इसी बात पर मैंने उससे झगड़ना शुरू कर दिया.
इस बीच वह मुझसे रिमोट बचाने के लिए अपने हाथ पैर चलाती हुई मुझसे झगड़ा कर रही थी.
मैंने उसकी मनोदशा को समझा और मैंने भी हाथ पांव चलाना शुरू कर दिए.
वह और ज्यादा झगड़ने लगी.
अब मैं कभी कभी उसके बूब्स भी दबा दे रहा था तो कभी उसकी गांवड दबा दे रहा था.
वह भी कुछ नहीं बोल रही थी, बस मुझसे लड़ रही थी.
बहुत देर तक यह सब चलता रहा था.
फिर वह वहां से उठ कर बाहर वाशरूम की तरफ चली गई और बहुत देर तक नहीं आई.
मुझे लगा कि वह नाराज़ होकर चली गई है. अब मैं उसे नहीं चोद पाऊंगा.
काफी देर तक जब वह नहीं आई, तो मैंने सोचा कि जाकर देखूँ तो सही, कहां चली गई है.
मैं उसको देखने के लिए वाशरूम की तरफ गया और वाशरूम के गेट पर खड़ा हो गया.
मैंने दरवाजे को हल्का सा धक्का दिया, तो समझ आया कि उसने दरवाजा अन्दर से बंद नहीं किया है.
जब मैंने कान लगा कर सुना, तो अन्दर से कुछ सेमक्षी सी आवाजें भी आ रही थीं.
मैं दरवाजा खोल कर अन्दर घुस गया और देखा तो वह अपनी बुर में उंगली डाल रही थी.
मुझे अन्दर आया देख कर वह सीधी खड़ी हो गई और नाटक करने लगी- यहां क्या कर रहे हो, बाहर जाओ. तुम्हें शर्म नहीं आती है क्या? यहां क्या कर रहे हो?
मैंने उसको देखते हुए कहा- देख, तुझे भी बुर की आग बुझानी है और मुझे भी अपने लमण्ड को ठंडक दिलानी है, तो आज अच्छा मौका है। चल साथ में मिल कर मजा करते हैं.
वह मेरी तरफ देखने लगी और मेरे साथ सेमक्ष करने को राजी हो गई.
उसकी बुर बहुत गर्म थी और उसको भी लमण्ड की जरूरत थी.
अब मैं उसको वाशरूम में ही किस करने लगा, साथ में मैं उसके बूब्स भी चूस रहा था.
वह भी मेरा साथ दे रही थी.
करीब दस मिनट तक हम दोनों के बीच चूमाचाटी चलती रही.
उसके बाद मैंने उसको पूरी नंगी कर दिया और उसकी बुर पर आ गया।
मैंने उसकी बुर पर अपनी जीभ फिराई तो वह सिहर गई और उसने मेरे सर को पकड़ लिया.
फिर मैंने अपनी जीभ को फिर से उसकी बुर की दरार में लगाई और बुर चाटने लगा.
अब उसे भी बहुत ज़्यादा मजा आ रहा था.
वह मेरा सर पकड़ कर मुझसे अपनी बुर चटवा रही थी. मैं भी मजे से उसकी कुंवारी बुर चाट रहा था.
थोड़ी देर चाटने के बाद वह मेरे मुँह में ही फ्री हो गई.
उसका नमकीन पानी बड़ा ही खट्टा और कसैला सा था.
अब अपने लमण्ड को चुसवाने की बारी थी.
मैंने अपना गांवड बाहर निकाला तो उसको देख कर वह डर गई.
वह बोलने लगी- इतना बड़ा में नहीं ले सकती हूँ.
मैंने कहा- क्यों? इसमें क्या कांटे लगे हैं?
वह बोली- नहीं ये बहुत बड़ा है।
मैंने कहा- तुझे कैसे मालूम है कि ये बड़ा है? क्या इससे पहले तूने किसी का इससे छोटा वाला लिया है?
वह मुझे घूरती हुई गुस्से से बोली- साले घर से बाहर तो निकलने मिलता नहीं है, फिर किसका ले पाई होऊँगी?
मैंने कहा- तो तुझे ये कैसे मालूम है कि मेरा बड़ा है?
वह बोली- मैंने नेट पर सब देखा है.
मैंने पूछा- क्या क्या देखा है, जरा बताना?
वह मेरी बात को हवा में उड़ाने लगी और मेरे लमण्ड से चुदने में आना-कानी करने लगी.
कुछ देर उसको मनाने के बाद मैंने उसको अपना गांवड मुँह में डालने को बोला तो वह लमण्ड चूसने से भी मना करने लगी.
ज़्यादा फोर्स करने पर उसने लमण्ड को चूसना शुरू कर दिया.
एक बार लमण्ड का स्वाद उसकी जीभ को अच्छा लगा तो वह करीब दस मिनट तक चूसती ही रही.
मैं उसके मुँह में ही फ्री हो गया और वह मेरा सारा माल पी गई.
हम दोनों को एक दूसरे का आईटम चूसने में बहुत मजा आया था।
फिर मैंने उससे कहा- अब तुम्हारी बुर की आग मिटना तय है.
उसने भी कामुक आवाज में कहा- हां ठीक है, लेकिन रूम में चलो … यहां पर नहीं.
हम दोनों रूम में आ गए।
रूम में लाकर मैंने उसको बिस्तर पर लेटा दिया और खुद उसके पास में लेट गया।
थोड़ी देर के बाद मैंने फिर से उसके मम्मों के साथ खेलना शुरू कर दिया.
इससे उसका भी मूड बनना शुरू हो गया.
उसने कहा- मुझे 69 की पोज़िशन में करना है.
मैं भी मान गया- ठीक है.
अब हम दोनों 69 की पोजीशन में आ गए और एक दूसरे का अंग चूसने लगे.
उसकी बुर से बहुत ज्यादा पानी निकल रहा था जो कि बड़ा ही टेस्टी था।
वह मेरे सर को अपनी टाँगों से दबाए हुई थी और गांवड उठाया कर बुर चुसवा रही थी.
काफी देर तक मैंने नंगी बहन की चूवती चाटी.
थोड़ी देर में ही मेरा गांवड एकदम से लोहे जैसा टाइट हो गया.
उसने कहा- अब मुझसे रहा नहीं जाता … तुम मेरी बुर के अन्दर अपना लमण्ड डाल दो और मेरी बुर फाड़ कर इसका भोसड़ा बना दो. आज से मैं तुम्हारी हूँ। तुमको मेरे साथ जो भी करना है, कर लो … आज हमें कोई मना नहीं करने वाला है।
मैंने भी मौका देख कर उससे कहा- ठीक है, तो लमण्ड लेने के लिए रेडी हो जाओ. अब अपनी बुर को भोसड़ा बनाने की पीड़ा को सहन कर लेना.
वह बोली- हां मुझे मालूम है कि पहली बार में दर्द होता है मैंने फिल्म देखी है.
मतलब वह भी सब समझती थी और चुदवाने को रेडी थी.
मैंने उसको सीधा लिटाया और खुद उसके ऊपर चढ़ गया.
मैं जैसे ही उसके ऊपर चढ़ा और अपना लमण्ड का सुपारा दिव्या की बुर की फांक में घिसने लगा.
वह गांवड उठा कर लमण्ड अन्दर लेने की कोशिश करने लगी.
अभी लमण्ड बुर का मिलन हो पाता कि तभी कहानी में एक मोड़ आ गया.
उसका फोन बजने लगा।
उसने देखा कि फोन पर उसके भाई की कॉल आ रही थी.
उसने जैसे ही कॉल उठाई तो उसका भाई बोला- मैं दो मिनट में घर आ रहा हूँ. मेरे लिए जल्दी से खाना बना देना.
फिर उसने मुझे यह बताया तो हम दोनों ने अपने कपड़े पहन लिए.
वह खाना बनाने चली गई और मैं रूम में जाकर टीवी देखने लगा.
इस वजह से मैं उसकी बुर की आग नहीं मिटा सका.
लेकिन आपको मैं अगली सेमक्ष कहानी में बताऊंगा कि उसकी बुर की आग को मैंने कैसे शांत किया.